आपदा है, अस्पताल में जगह नहीं है, पर हम अस्पताल के लिए लडे ही कब थे! - उमेश तिवारी

By vindhyanews18.com Fri, May 7th 2021 breaking 99 Views    


सीधी।
टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने अपने विज्ञप्ति में कहा है कि बदइंतजामी के चलते कॅरोना महामारी से अस्पताल में, बैंटिलेटर में, स्टेशन पर, घरों पर लोगों की जिंदगी समाप्त हो रही है जो बहुत ही दुखद है। सत्ताधीशों को निकम्मेपन से अस्पताल, डॉक्टर, दवाई, बेड, आक्सीजन अन्य आवश्यक स्वस्थ सुबिधाओं की कमी के चलते लोगों को बेबसी से तड़प तड़प कर मरते हुए देखा जा रहा है। जहां दर-बदर भटकते मदत के लिए मरीज़ों के परिजन बेहाल है वहीं मरीज जिंदा है तो अस्पताल में जगह नही, मर गया तो समसान में जगह नही। एक एक सांस के लिए मोटी रकम चुकाना पड़ रहा है, घर बेचने की स्थिति है। सरकार किस लिए हमने चुना था अब तो समझ में आ जाना चाहिए कि जनता सरकारों की प्राथमिकता में कहीं भी नहीं है।
उमेश तिवारी ने कहा कि सारे नेता अपने-अपने घरों के सुरक्षित किले में आराम फरमा रहे हैं। उनके लिए अच्छे डाक्टरों और दवाईयों सहित दूसरी आवश्यक सामग्री का पूरा इंतजाम है। पैसे वालों के लिए भी सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। बिना इलाज मर रहे हैं गरीब बहुसंख्यक मेहनतकश लोग , जिनके पास जेब में दवाईयों, डाक्टरों, नर्सों, वेंटिलेटर, आक्सीजन सिलिंडर और अन्य जरूरतों के लिए पैसे नहीं हैं। जब मुर्दों को जलाने के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, तो बाकी की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायक सिर्फ वक्तव्य जारी करने में व्यस्त हैं। इलाज वाले किसी भी जगह पर कोई अदना सा नेता भी देखने-सुनने वाला नहीं है। इस संकट में जहां जरूरत थी सामान्य लोगों के बेहतर इलाज की वहां नेता और नौकरशाह व्यस्त हैं सिर्फ वक्तव्य जारी करने, डपोरशंखी योजना बताने में।
उमेश तिवारी ने कहा कि जो सरकार भाजपा कार्यालय बनाने में, मूर्ति बनाने में हजार करोड़ खर्च कर सकती है, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं परिसंपत्तियों को अभी तक की सबसे महंगी सरकार चलाने के लिए बेचती है, प्रधानमंत्री के विदेश दौरों और प्रचार पर अरबों रुपये खर्च करती है, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की यात्रा के लिए अमेरिका से करीब 5 हजार करोड़ रुपये के विशेष विमान खरीदती है, 20 हजार करोड़ की लागत से नई संसद, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के लिए महल बनाने के लिए ब्यवस्था कर सकती है, देश के पूंजीपतियों और कारपोरेट घरानों के हितों के लिए जो सरकार बीस लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी, राहत और कर्जमाफी कर सकती है, दस लाख करोड़ रुपए का एनपीए माफ कर सकती है, बैंकों को सस्ते और बिना किसी बाधा के कर्ज देने के लिए बाध्य कर सकती है, उस सरकार ने जरूरतमंद लोगों के इलाज की व्यवस्था के लिए कॅरोना के पहली लहर से दूसरी लहर के दरमियान साल भर का समय था उसमें कुछ भी क्यो नही किया? हाँ ताली, थाली, संख, सायरन बजवाने और दिया, मोमबत्ती जलाने, बिजली बुझाने का टोटका और पाखंड का भरपूर इस्तेमाल किया गया।
उमेश तिवारी ने कहा कि कॅरोना महामारी की चपेट में आने वाले लोग बिस्तर, दवाई, आक्सीजन, वेंटिलेटर, वैक्सीन, एम्बुलेंस के लिए मारे-मारे फिरते हैं फिर यह सवाल क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि “70 सालों में कुछ नहीं हुआ” का शोर मचाने वालों ने 7 सालों में यह हालत बना दी है कि महामारी से संक्रमित लोग फुटपाथों पर दम तोड़ रहे हैं इनके परिजन भिखारियों की तरह जिस-तिस के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं। परिजन मृतकों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहे हैं।
उमेश तिवारी ने कहा कि आग लगने पर कुआं खोदने की बात करने वाले बेईमानो से लोगों ने अपने बुनियादी मुद्दों के लिए न तो संघर्ष किया न ही जवाबदेहों से कभी सवाल खड़ा किया ना ही सवाल खड़ा करने वालों के साथ मिलकर खड़े हुए, हां मंदिर मस्जिद के लिए लडते रहे वो आज बन्द हैं और जुमलेवाज रैलियों में मस्त है।

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